हर सौ साल पर लौट के आनेवाला वो ख़तरनाक लम्हा क्या फिर दुहराएगा ??

कुछ सालों के इतिहास टटोलने पर एक बड़ा ही अचंभित करनेवाली जानकारी हाथ आयी है जिसको हम यहाँ पर अपने मेंबर्स के साथ बाँटना चाहेंगे।

आज जिस तरह कोरोना वाइरस का प्रकोप सारी दुनिया में फैला हुआ है और फैलता ही जा रहा है ये कोई पहली घटना नहीं है। ऐसे हादसे दुनिया ने पहले भी देख रखी है। 1720 में प्लेग, 1820 में कोलेरा और 1920 में ब्यूबॉनिक ने काफ़ी तबाही मचा रखी है। अगर इसको ध्यान से देखें तो साफ़ दिखता है की ये कोई पैटर्न बना रहा है हर सौ साल पर ऐसा कुछ होना। थोड़ा विस्तार से जानने के लिए आगे पढ़ें :

1720 प्लेग का क़हर : फ़्रान्स के एक शहर मर्सेल्ले में एक लाख के क़रीब लोग इस बीमारी के शिकार हुए थे। ये युरोप में हुई ऐसी बड़ी दुर्घटना है जो उस समय समाज के सामने आयी।

1820 पहला क़ोलेरा प्रकोप : एक लाख से ज़्यादा लोग इस चपेट में आए और मौत के शिकार हुए। जो देश इसमें ख़ास प्रभावित हुए उनमे थाईलैंड, इंदोनेसिया और फ़िलिपींस का नाम आता है।

1920 स्पैनिश फ़्लू : H1N1 वाइरस के तौर पर फैला इनफ़्लुएंज़ा उस समय काफ़ी ख़तरनाक साबित हुआ। 1918 से 1920 तक का ये समय काफ़ी परेशानी से भरा रहा पूरे विश्व के लिए। इस वाइरस की पहुँच काफ़ी गहरी रही जिसमें क़रीब 5 करोड़ लोग इन्फ़ेक्ट हुए और विकिपीडिया के रेकर्ड्ज़ के हिसाब से क़रीब 1 करोड़ लोगों को मौत का शिकार भी होना पड़ा। ये समय इतिहास का सबसे ज़्यादा दिल दहलाने वाला समय रहा।

 

ये सब देखें तो मन में एक ख़ौफ़ तो उठता ही है कि कहीं वूहान चाइना से शुरू हुआ ये कोरोना वाइरस का क़हर पुराने सारे रेकर्ड्ज़ को नहीं तोड़ डालेगा। अभी तक के समाचार के हिसाब से जिस दर से ये लोग संक्रमित होते जा रहे हैं और जिस तरह से ये वाइरस फैल रहा है ये कुछ ख़ास ही प्रलय लाने वाली घटना बन सकता है। कुछ दिनों में ही तीन गुना लोग इंफ़ेक्ट हुए हैं और मौत की गणना रोज़ ही बढ़ती जा रही है।

 

नोवल कोरोना वाइरस या जिसको COVID 19 के नाम से भी जाना जाता है, अभी तक वज्ञानिकों को ये वाइरस पूरी तरह समझ नहीं आ पाया है। रीसर्च जारी है, कि इसपे किस तरह रोक लगाया जा सके और लोगों को बचाया जा सके। अब तक के सारे वाइरस प्रकोप संक्रमित जानवरों से और बेक्टेरिया से ही फैले हैं। प्लेग मक्खियों से फैला था, जिसमें मरे हुए इंफ़ेक्टेड जानवरों के शरीर से इन्फ़ेक्शन को ले कर वो खाने इत्यादि में फैला देते थे। कोलेरा vibrio cholera बेक्टेरिया से फैला। ये बेक्टेरिया नमकीन या हल्के गरम पानी में पाया जाता था जो खाने में मिल कर सब को इंफ़ेक्ट कर देता था और लोग उसी तरह का खाना खा पी के इंफ़ेक्ट हो जाते थे।स्पैनिश फ़्लू एक तरह का वाइरस था जिसे एवीयन इनफ़्लुएंज़ा कहा जाता है और ये चिड़ियों द्वारा फैला था। नोवल कोरोना वाइरस भी वूहान चाइना में seafood मार्केट से आया।

 

एहतियाती तौर पर पूरे विश्व की सरकारों ने अपने लेवल पर काफ़ी चुस्ती दिखायी है और काम ठीक से चल भी रहा है। ज़रूरी क़दम भी उठाए जा रहे हैं, मगर जिस तरह ये फैल रहा है, इसमें किसी भी तरह की बड़ी तैयारी भी नाकाफ़ी साबित हो सकती है। वैसे तो WHO ने भी इसे इमर्जन्सी कि तरह घोषित कर दिया है और उसे " पब्लिक हेल्थ इमर्जन्सी आफ इंटर्नैशनल कन्सर्न " का नाम दिया है।

 

Source :- philnews.ph

 


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