NewsPolitics

क्या राहुल गांधी मोदी की लहर को रोक पाएंगे?

Kya rahul modi ki

क्या राहुल गांधी मोदी की लहर को रोक पाएंगे?
इस बात से सब वाकिफ है की 2014 के चुनाव में सिर्फ एक ही नाम सबके सिर चढ़ कर बोल रहा था और वो था मोदी. मोदी की बदौलत ही भाजपा ने 300 से ज्यादा सीटें जीती थी और विपक्ष को कड़ी टक्कर दी थी. आज नरेंद्र मोदी आज किसी नाम के मोहताज नहीं है क्योंकि आज के टाइम में उन्हें बच्चा-बच्चा जानता है.
सच में मोदी की लहर ने तहलका मचा दिया था. उनकी एनर्जी, बोलने की कला, चीजों का सटीक ज्ञान और गुजरात में उनके काम की वजह से लोग उनके कायल हो गये थे. ऐसा लग रहा था 2014 का चुनाव किसी पार्टी के बीच ना होकर सिर्फ एक व्यक्ति पर केन्द्रित हो गया था. लोगों ने वोट भी सिर्फ और सिर्फ मोदी के नाम से दिए थे.
उस लहर में तो ऐसे जिले और राज्य भी जीत गए जहां कभी भाजपा का परचम तक नहीं था. अब 2019 में मोदी के पांच साल पुरे हो रहे है और फिर एक बार मोदीजी ने चुनाव की बागडोर संभाल ली है और पहले की तरह फिर से एनर्जी के साथ भाजपा के प्रचार में जुट गये है. लेकिन इस बार उनके सामने कड़ी टक्कर है.
एक तरफ सारा विपक्ष गठबंधन बनाकर खड़ा है तो एक तरफ मोदी अकेले. इस बार तो कांग्रेस के राहुल गांधी भी जी-जान से और नई एनर्जी के साथ प्रचार में जुटे है. लेकिन सवाल यह है की क्या राहुल गांधी मोदी की लहर को रोक पाएंगे? क्या मोदी फिर इस बार प्रधानमन्त्री बनेंगे? क्या भाजपा बहुमत हासिल करने में सफल होगी? सवाल बहुत से है आईये जानते है कौनसी ऐसी वजह हो सकती है जिनसे राहुल गांधी मोदी को टक्कर दे सकते है.

इन वजह से मोदी को कड़ी टक्कर मिल सकती है
1. बदलाव
यह समझने के लिए किसी राकेट साइंस की जरूरत नहीं है की राहुल गांधी बदलाव से गुजर रहे है. अब उनके पास कई ऐसे मुद्दे भी है जिनसे वे मोदी को घेर सकते है. आजकल राहुल गांधी में नई ऊर्जा और एनर्जी देखने को मिल रही है. अब लोग पप्पू कहने से पहले सोचेंगे क्योंकि राहुल ने कांग्रेस की पूरी कमान संभाल रखी है.
2. लोकसभा चुनाव में हार
उत्तरप्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनावों में भाजपा को हार मिलना भी पार्टी के लिए एक झटका है. अब तक भाजपा 2014 के बाद 6 सीटें गंवा चुकी है. क्या इसे मोदी-शाह के लिए खतरे की घंटी माना जाये?
3. लोगों से मिलना
राहुल गांधी अपने परदादा जवाहरलाल नेहरु की तरह भारत भ्रमण करते हुए लोगों से मिल रहे है और उनकी समस्याएं जान रहे है और लोगों की भावनाओं को समझने की कोशिश कर रहे है. ऐसे में इस तरह से उनका लोगों के बीच में जाना और उनकी समस्याओं को समझना भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है. क्या सच में लोग राहुल गांधी का साथ देंगे? खैर इसका जवाब तो चुनाव के नतीजे ही बताएँगे.
4. गुजरात चुनाव से ताकत
गुजरात में हुए चुनाव में धुँआधार प्रचार के बावजूद भाजपा बहुत ही मामूली बहुमत हासिल कर पाई थी जबकि गुजरात मोदी का गढ़ था. इससे भी राहुल को ताकत मिली है. हार्दिक पटेल, अल्पेश, जिग्नेश जैसे युवा नेताओं का सपोर्ट भी मिला जिससे वे मोदी-शाह को चुनोती देने में सक्षम रहे. इससे दो बातें साफ़ है पहली मोदी के किले में सेंध लगाईं जा सकती है और दूसरी अगर सोच-समझकर विपक्ष एकजुट हो जाए तो भाजपा को कड़ी टक्कर मिल सकती है.
5. कुछ अहम मुद्दे जिन पर मोदी सरकार को घेरा जा रहा है
रोजगार, नोटबंदी, रक्षा बलों की बदहाली, रफाल डील, GST, नीरव मोदी आदि कुछ ऐसे मुद्दे है जिन पर कोंग्रेस अक्सर भाजपा को घेरे जा रही है. हालाँकि भले ही भाजपा के नेता आरोपों को खारिज करते है लेकिन ऐसे आरोप अक्सर मतदाताओं पर असर डालते है. वो कहते है ना की “डूबता को तो तिनके का सहारा भी काफी होता है”.
6. विपक्ष का एकजुट होना
सब पार्टियां यह अच्छे से जान चुकी है की मोदी को अकेले रोकना नामुमकीन है. इसलिए सबने मिलकर महागठ्बन्धन बना लिया है और सब मोदी के विरोश में हो गये है. इससे भी राहुल गांधी को ताकत मिली है जिससे मोदी का सामना करना थोड़ा आसान हुआ है.
इन कारणों से मोदी को रोक पाना मुश्किल है
हालाँकि इन सबके बावजूद ऐसी कोई मोदी विरोधी लहर नहीं है जैसी इंदिरा गांधी के समय थी. उस समय सबकी जुबान पर “इंदिरा हटाओ” के नारे थे. सिर्फ मोदी पर आरोप लगाने से और भाजपा की नाकामियाँ गिनाने से कुछ नहीं होने वाला बल्कि मोदी के सामने राहुल को नया दूरदर्शी नेता प्रस्तुत करना होगा जो मतदाताओं को आकर्षित कर सके.
इसके अलावा मोदी के लिए सकारात्मक चीज यह है की भाजपा में उन्हें अंदर से कोई चुनोती नहीं दे रहा है. दूसरी और राहुल विपक्षी द्लों का ऐसा चेहरा नहीं है की उन्हें सबका समर्थन मिले. इतना तो पक्का है की राहुल 2019 में अकेले मोदी को नहीं रोक सकते लेकिन गुजरात, गोरखपुर और फूलपुर में अपनाई रणनीति से मोदी के रथ की गति को धीमी कर सकते है.
अब देखना यह है की क्या राहुल वाकई मोदी को रोक पाते है या सिर्फ यह उनका भ्रम रह जाता है. क्या सच में अब भी मोदी की लहर है? क्या अब भी कोई मोदी को कड़ी टक्कर नहीं दे सकता? क्या सारा विपक्ष भाजपा को रोक पाने में सफल रहेगा? क्या कोई ऐसा नेता होगा जो मतदाताओं को लुभा पायेगा? अगर आपके मन में इनसे संबधित कोई सवाल, जवाब या जिज्ञासा हो तो कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख सकते है.

Comment here