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पान्डुजी क जान बच आई… Panduji series (10)

पा डुजी क जान बच आई

चाचा शँभु की लड़की द्वारा पान्डुजी जो अस्वीकृत थे हो आए
इसलिए वे बहुत गहरे सदमें में थे आए
अब जब उन्हे हल्वाई नत्थुलाल की लड़की देखने को था जाना

उन्होने अपने को फिर से रँग बिरँगा लँगूर नहीं था कहलवाना
इसलिए उन्होंने आज इक सादा सा सफेद कुर्ता पायजामा था पहना
अम्मा ने रँगीन कपड़े पहनने को बहुत कहा पर उन्होने उनका कहा ना माना
और आज अम्माजी को सँग ले कर थे चले

पहँचने पर देखा कि नत्थुलाल ने अपने घर के रँग करा रखे थे हरे लाल नीले पीले
जैसे ही पान्डुजी अम्मा सँग वहाँ पधारे
उन्हे देखने के लिए नत्थुलालजी ने बुला रखे थे रिश्तेदार अपने सारे
जो उचक उचक कर उन्हे घूर घूर के ऊपर से नीचे तक थे देख रहे
हर कोई अपने ढ़ँग से मुआयना पान्डुजी का थे कर रहे
ऐसा लग रहा था मानो कोई रिऐलटी शो था चल रहा
और हर जज पान्डुजी को आँक नम्बर अपने था दे रहा
पान्डुजी इतने लोग देख घबरा गए
इसलिए बोलते वक्त थोड़ा थे हकला गए
अम्मा ने फिर चुपके से चूँटी थी काटी उनके
और पान्डुजी मुँह बँद कर ढम से कुर्सी पर बैठ गए जमके
उनकी खूब आवभगत थी की गई
विभिन्न प्रकार की रँग बिरँगी मिठाइयाँ थी मेज़ पर सजाई गई
ठँडा शरबत पेश था किया
जो घबराहट में पान्डुजी ने कुरते पर थोड़ा सा था उलेड़ दिया
इक सँदेश ,बरफी का टुकड़ा, गुलाबजामुन, समोसा जो था खाया
कि पान्डुजी को जोर से डकार था आया
डकार सुन अम्माजी ने जब उनको आँख थी दिखाई
तो घबराए पान्डुजी की घिग्गी थी बँध आई
और वो आँखे नीचे कर बैठ गए
लगता है छोरो अभी से शरमा गए
छोरी आएगी तब इनका का हाल हो
चेहरा इनका तो अभी से इनका लाल हो
हँस कर छोरी की चुलबुली चाची थी बोली
चूस रही थी जो चटकारे ले मुँह में चूरण की गोली
इससे पहले कि अम्मा कुछ जवाब दे जाती
चाचीजी को कुछ खरी खोटी सुना जाती
क्योंकि ऐसा मौका वो हरगिज़ नही गँवा पाती
ईँट का जवाब पत्थर से देने की नीति जो हरदम थी अपनाती
कि कमरे में लड़की थी आ गई
देख कर उसको पान्डुजी की आँखे थी चुँधिया गई
लड़की बहुत ही मोटी ताज़ी थी
सोचे पान्डुजी ,पता नही अम्मा कैसे हो गई राज़ी थी?
लड़की किसी हथिनी से कम ना लग रही थी
टुनटुन आँटी भी उसके सामने पतली कमसिन सी दिखती थी
देख कर लड़की पान्डुजी को तो पसीना आ गया
आँखो के आगे अँधेरा छा गया
दिन में तारे उनको नज़र आने लगे
तरह तरह के ख्याल दिल में सताने लगे
कि वो पान्डुजी डेढ पसली के उसके साथ कैसे दिख पाऐंगे?
वो तो लड़की के बोझ तले यूँही मर जाऐंगे
एक हाथ लड़की ने यूँही टिका दिया
थोड़ा ज़ोर से लगा दिया
तो वो तो ज़मीन पर सूखे पेड़ की तरह गिर जाऐंगे
जवाब में डर के कुछ कह भी ना पाऐंगे
सब दोस्त खिल्ली उन की उड़ायेंगे
साँडनी के पति उनको बुलाऐंगे
और ये उन्हें कतई मँज़ूर ना था
ऐसा रिश्ता उन्हे कबूल ना था अम्माजी तो लड़की देख प्रसन्न बड़ी आ रही थी
नज़र जो उस पर अपनी गड़ा रही थी
मुख पर हँसी उनके छा रही थी
हथिनी लड़की उन्हे तो बड़ी भा रही थी
इससे पहले कि अम्मा हामी भर जाती
रोबदार बहुरिया अपने लिए कर जाती
पान्डुजी ने झट से घोड़े सी फुर्ती दिखाई
ना ना कहते तशरीफ की टोकरी अपनी उठाई
और दुमदबा के बाहर लपक लिए
झट से घर जाती बस पकड़ लिए
अम्मा उनकी इस हरकत पर लोगों की चार बातें सुन भिनभिनाती हुई जब घर को आई
तो पान्डुजी को पहले खूब खरी खोटी सुनाई
फिर खूब समझाया
कितना दहेज मिलेगा इस बात से भी रिझाया
पड़ोस में दबदबा बना रहेगा
रोब उनका जमा रहेगा
पर अम्माजी की किसी बात से भी पान्डुजी के कान पर तो जूँ तक ना रेंग पाई
उन्होने तो उस हथिनी लोगाई के होने के डर के ख्याल से ही किसी तरह अपनी जान थी बचाई…

द्वारा अनु सैनी

 

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