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पान्डुजी पर बाॅडी बनाने का चढा बुखार-Panduji series(4)

पान्डुजी पर बाॅडी बनाने का चढा बुखार

पान्डुजी खाने में बहुत शेर थे
खाने के लिए कर जाते हेर फेर थे
जितना मिलता सब खा जाते
मौका मिले तो दूसरों का भी डकार जाते
पर इतना खाया पिया कहाँ था जाता
देख कर पान्डुजी को समझ ना आता
क्योंकि सूखी डण्डी से दिखते थे
पतले सुकड़े डेढ पसली के थे
फूँक मारो तो शायद उड़ भी जाते
तेज हवा चले तो नाले मे कितनी बार थे गिर जाते
फिर चोटों पर मरहम पट्टी करवाते
डाक्टर भी देख उन को कह जाते,
“का भईया,का ठीक से नहीं हो खाते?
क्यों नहीं थोड़ी सेहत बनाते?
थोड़ा जिम में कसरत कर आओ
योगा अपनाओ थोड़ा तो अपना हुलिया ठीक कर आओ
अपनी बाॅडी को मजबूत बनाओ
का छिपकली जैसे दिखते हो?
मरियल घोड़े समान चलते हो
ऐसे कोई लड़की तुम्हें कैसे पसन्द कर जाएगी?
शादी तुम्हारी कैसे हो पाएगी”
ये बात पान्डुजी के दिल को लग गई
अगले ही दिन पान्डुजी की सवारी जिम को चल दी

पर जैसे ही जिम की फीस पान्डुजी ने सुनी
पान्डुजी की तो सारी हवा निकल गई
बोले”इतना तो हम ना दे पाऐंगे
फिर घर का भेजेंगे, का खायेंगे
“सो जिम जाने का विचार बेकार था हो गया
पर सेहत बनाने का भूत उन पर सवार था हो गया
बोले,”कल से हम भागने जाऐंगे
साथ में साइकलिग कर आऐंगे
बिन पैसे बाॅडी बनायेंगे
इन जिम वालो को फिर मुँह की दिखायेंगे”
फिर क्या था अगले ही दिन पान्डुजी सुबह सुबह तैयार हो गए साइकिल पर चढ सवार हो गए पान्डुजी ने पाँच किलो मीटर साइकिल इतनी तेज़ चलाई कि हवा से उसे बातें कराई फिर मैदान में उतर कर जोश जोश में दस चक्कर लगाए कि टाँगों में उनके मरोड़ पड़ आए फिर तो साइकिल पकड़ बड़ी मुश्किल से चार घण्टे बाद घर वापिस आए दर्द के मारे दो दिन बिस्तर से उठ भी ना पाए और मालिक से डाँट अलग खाए
हफ्ता भर लँगड़ा लँगड़ा कर ही चल पाए
तो ये आइडिया भी वो पीछे छोड़ आए
फिर योगा मास्टर से योग सीखने गए

पर बहुत सिखाने के बाद एक भी आसन ठीक से जब ना कर पाए
तो योगा मास्टर जी गुस्से से उन पर चिल्लाए
ये पान्डुजी बेइज़्ज़ती अपनी सब के सामने सहन ना कर पाए
इसलिए छोड़ छाड़ योगा घर भाग आए
पर अभी तक सेहत बनाने का जनून उनके सिर से उतरा ना था

तन्दरुस्त उन्हें अपने को जो देखना था
इसलिए इक दोस्त के घर से डम्बलज़ उधार ले आए
फिर दे धड़ाधड़ उनको लिए उठाए
कि दूसरे ही दिन बाहों में ऐसा भयँकर दर्द उठ आया
कि पान्डुजी के मासपेशियाँ बनाने का सारा जोश फुर्र हो आया
अच्छे लगने लगे तब उन्हे अपने डौले पोले पोले
देख कर अपने को शीशे में वो बोले,

“अरे छोड़ो,मारे को क्या करने की ज़रूरत है ये कसरत शसरत
जब टाइम अच्छा आएगा,फिर अपने आप ही लड़की हम पर मरतऔर फिर घरवाली बनत…ये सेहत बनाने के चोंचले हमसे नहीं हो सकत
कितना बर्बाद किये हमने यूँही इतना वकत
हम तो बिन बॅडी के यूँही सलमान खान लगत.…”

द्वारा अनु सैनी

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