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पान्डुजी के ब्याह का ख्याल – Pandu-Ji series (8)

पान्डुजी के ब्याह का ख्याल

आखिर पान्डुजी की अम्मा को पान्डुजी के ब्याह का ख्याल आ ही गया
जब आस पास के पान्डुजी से भी छोटे छोरों का ब्याह भी हो गया
तो उसने आस पढोस बात चलाई
रिश्ते दारों को भी खबर पहुँचाई
और फिर तीन चार बताई लड़कियाँ देख आई
फिर पान्डुजी को चिट्ठी लिख खबर पहुँचाई,
“कि बबुआ,कितने दिन कुँवारे खुले साँड की तरह घूमे रहो
घर आए रहो
हम दो चार लड़की तुहरा खातिर पसन्द किये हो
तुम भी आकर देख लयो
आकर लड़की पसन्द कर जाओ
घर बार लड़की वालों का देख जाओ
फिर जहाँ कहोगे
हम वहाँ तुहार ब्याह कर देंगे
पर हाँ ,ये ध्यान रखना
हमरी बात गाँठ बाँध के रखना
कि बहुरी हमार सेवा करने वाली हो
हमार कहना मानने वाली हो
हमसे चूँ चड़ाक ना करे
पर अगर पढ़ोसी हमका तँग करे
फिर उनसे हमरा सम्मान खातिर जाकर लड़ पड़े
और जरूरत पड़े तो तीन चार खींच के उनको लगा भी दे
थोड़ा उनका डरा भी दे
ताकि दबदबा हमरा बना रहे
रोब हमरा पढ़ोस में जमा रहे
तुहार दादी ने भी हमसे यही करवाया था
और तुम तो जानत हो,हमने ससुराल की इस परम्परा को दिल से निभाया था
मजाल है कोई हमरे सामने टिक पाया
पर वैसे दिल हमने कोमल सा था ही पाया
और हाँ ,देखना ,ज्यादा लिपसटिक लाली पर पैसा बरबाद करने वाली ना हो
कपड़ा लता फालतू का खरीदने वाली ना हो
पर मायके वाले जो दे
कभी ना ना करे ,खुसी खुसी ले ले
पर ससुराल में बेफिजूल का खर्चा कतही ना करे
पैसा जोड़ हमरे पास ही संभाल कर रखने के लिए धरे
बूँद बूँद बचाएगी
तभी तो मटका भर पाएगी
हर समय सिर पर ओढणी ओढ के रहे
और आजकल की छोरियों की तरह बेसरमी ना करे
तुम समझत रहे
हम का कहने की कोसिस कर रहे
डेढ पसली के तुम लगत हो
गाय भी आ जाए तो तुम डरत हो
तो छोरी तुम को देख कर का डर पाएगी?
थारी कही बात कहाँ मान पाएगी?
उलट तुम पर रोब जमाएगी
अपनी बात मनवाएगी
इसलिए सुरू से ही तुम उसको अपने अँकुस मे रखना
अपना रूतबा बनाए रखना
अपने पुरखों की तरह भीरू बिल्ली मत बने रहना
अपनी लोगाई पर पूरा अपना कन्ट्रोलवा रखना
इसलिए थोड़ा मुख पर मुछवा उगाए लो
बाल अपने ठीक तरह से मुँडवाए लो
ताकि थोड़े तो रोबदार मर्द लगना चाहिए
छोरी के साथ सजना चाहिए
बाकी हम अब सब तुहार ऊपर छोड़ दिए है
कौन सी छोरी तुमहरा पसन्द आए रहे है?
तुम तो हमें जानत हो ,हम तो कभी कछु कहत नही
कोई नखरा करत नही
बस तुम को छोरी पसन्द आ जाए
बात तो तब बने
खुसी मारी छाती मे हो, जब पान्डु बेटा मारा दुलहा बने
सो ,पान्डु बबुआ,अब ना रहना तुम निकम्मा
तुहार अपनी प्यारी अम्मा।”
पढ कर अम्मा की हिदायतों से भरी ये चिट्ठी
बेचारे पान्डुजी की तो हो गई थी गुम सिट्टी बिट्टी
अभी लड़की देखी भी नही थी
पर अम्माजी की तो उम्मीदें उम्मीद से भी ज्यादा कई थी
पर ब्याह हो जाएगा इस बात का सोच सोच कर पान्डुजी के मन में लड्डु फूटने लगे
और वो जोरों शोरों से गाँव जाने की तैयारी करने लगे.…

द्वारा अनु सैनी

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