इज़्ज़त पान्डुजी की - Pandu-Ji series(1)

घण्टी जैसे थी बजीपान्डुजी की निन्दिया थी तजी

"इस समय कौन कम्बख्त तँग करने आ गया है",झल्लाकर वो अन्दर से बोला और जैसे ही उसने किवाड़ खोलातो क्या देखा, कि पुलिस दरवाज़े पर थी खड़ीहाथ में पकड़े चमकीली हथकड़ीदेख कर उसको पान्डु घबरायापसीना उसको जोर से आयाऔर तभी सुसु का भी दबदबा बन

आया और वो हकलाया,"क क किस को पकड़ने आए हैं "आपम म माफी हमको दे दो माई बापस स सुसु करके हम अभी है आतेकहो तो ,बाऊजी को अन्दर से हैं बुलाते,"पर हवलदार कहाँ था सुनने वालाकाला सा था भारी भरकम बड़ी बड़ी मूछों वालाझट से धीरे से पान्डुजी की गर्दन को धर दबोचापान्डुतो था बेचारा डेढ पसली का

डर से काँपता रोता हुआ बोला,"माई बाप ,मेरा कसूर तो बताओक्या मैने कर दिया कृप्या कर मुझे समझाओक्यों ज़ुल्म मुझ पर हो ढा रहे?वर्दी का रोब जमा रहेमैं बेचारा इक गरीब सा बन्दा

जाने दो जोर से आया है वरना पाजामा हो जाएगा गन्दाशौचालय से होकर मैं जैसे ही आताफिर इत्मिनान से आपके सब प्रश्नों का उत्तर दे जाता"

देख कर उसकी हालत खस्ता

हवलदार से रहा नही गया और वो बोला हँसता हँसता," अरे भईया ,तुम हमको भूल गए का?हम तुहार फुफुरे चाचा का बचवाबचपन में तुहार निकर उतार देतेजब गुल्ली डण्डा तुम सँग खेलतेतुम तो आज भी नही हो बदलेपुलिस देख कर अब भी तुम्हारा सुसु है निकलेहम तो तुम को मिलने को आए थेअम्मा तुम्हारी ने मोतीचूर के लड्डु भिजवाये थेसोचा तुम को दे भी आयेंइसी बहाने तुहार हाल चाल भी पूछ आयेंपर तुम तो हम को देख कर डर गएभीगी बिल्ली से बन गएका कुछ गलत करे हो?काहे इतना डरे हो? "सुन ये पान्डुजी की जान में जान आईघबराहट उसने झट से छिपाईअपने को सम्भाला

फिर चाँटा इक हवलदार की पीठ पर जमा डालाऔर बोला,"अरे ,कौन माई का लाल हम को डरा सके है?जूती की नोक पर हम सब को रखे हैंहम तो तुम्हारा मान रख रहे थेपुलिसगिरी तुम्हारी परख रहे थेवैसे इस घर में हमारा रोब बड़ा हैपर अभी थोड़ा ज़रूरी काम पड़ा हैइसलिए अब ज्यादा मत उछलोचाय पियो और भईया यहाँ से खिसक लो...."कह कर ये पान्डुजी ने अपनी झूठी शान बधाईजैसे तैसे उस दिन उन की इज़्ज़त बच आई...।

द्वारा अनु सैनी


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