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वो घङी…a short story

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वो घङी…द्वारा अनु सैनी

रोमा आज बहुत खुश थी। बार बार उसकी नजर घङी पर जा रही थी पर ऐसा लग रहा था कि घङी की सुइयां मानो एक ही जगह पर थम गई थी। आगे बढ ही नही रही थी। बेक़रारी से उसे पुलकित के घर आने का इन्तजार था। कितनी बार उसने ऑफिस फोन किया था पर हर बार “बिजी इन अ मीटिंग” का मिसेज आ रहा था। रोमा अपने आप को रोक नही सक रही थी। आज अगर उसके पास पंख होते तो वो उङ कर पुलकित के पास पहुच जाती और ये खबर सुनाती। कार चलानी उसे आती नही थी। पुलकित ने उसे बहुत बार सीखने को कहा था पर वो हर बार ये कह कर टाल देती “तुम्हारे रहते मुझे क्या जरूरत? जहां जाना होता तुम मुझे ले जाते और वैसे भी मुझे अकेले शापिंग करना अच्छा नही लगता। तुम साथ होते हो तो फिर तुम्हारी पसन्द का ले लेती हूँ क्योंकि तुम्हारी पसन्द बहुत अच्छी है। जब भी तुम्हारे दिलाए सूट पहनती हूँ

आस पास वाली पढोसिन हमेशा तारीफ करती, कहती “सच में रोमा तुम बहुत भाग्यशाली हो, जो पुलकित जैसा पति तुम्हे मिला, कितना ख्याल रखता तुम्हारा। शापिंग में भी साथ जाता और एक हमारे वो हैं , जो कह उठते “भई, तुम्हारे साथ शापिंग हम नही जा सकते। एक तो समय तुम कितना लगाती, ऊपर से कुछ पसन्द नही कर पाती , बस दुकानों के चक्कर लगवाती जाती। हमारे पास इतनी फुरसत कहां”

सचमुच तुम बहुत भाग्यशाली हो रोमा” और रोमा झट कह उठती”;टच वुड…नजर ना लगे, हां वो तो है पुलकित सचमुच मेरा बहुत ख्याल रखता। मैने पिछले जन्म में जरूर मोती दान किए होंगे ”

रोमा की जिन्दगी में सब कुछ बहुत अच्छा था। अपना घर था। गाङी थी। पुलकित की बङी कम्पनी में अच्छी पोस्ट थी। सास ससुर बङोदा में रहते थे। दोनो बहुत ही अच्छे थे। रोमा से बहुत प्यार करते थे। रोमा भी बहुत उनकी इज्जत करती थी। जब आते बहुत सेवा और आवभगत करती थी। सब कुछ था बस सिर्फ एक कमी थी, शादी के आठ बरस बाद भी उनके कोई बच्चा नही था। पहले दो तीन साल तो ज्यादा ध्यान नही किया पर फिर जब नही हुआ तो रोमा ने इलाज करवाना शुरू किया। पर नाकामयाबी ही मिली।

पर आज सचमुच खास था क्योंकि रोमा जब आज अपने चैक अप के लिए गई तो डाक्टर ने उसके गर्भवती होने की खबर सुनाई। पहले तो रोमा विश्वास ना कर पाई। फिर आँखों से खुशी के धारा बहने लगी। आज पुलकित जरूरी मीटिंग में था इसलिए वो नही आ पाया था। रोमा आज टैक्सी करके गई थी। और जब से क्लीनिक से वापिस आई थी वो औरों को बताने से पहले ये खुशखबरी सबसे पहले पुलकित को सुनाना चाहती थी। और आज ही पुलकित लेट हो गए थे। रोज शाम को सात बजे वो घर आ जाते थे पर अब रात के नौ बजने को आए थे पुलकित का मोबाइल भी “आउट ऑफ रीच “बता रहा था। रोमा को समझ नही आ रहा था कि पुलकित अब तक क्यों नही आए? इन्तजार की घडियां लम्बी होती जा रही थी।

तभी दरवाजे की घण्टी बजी और लपक कर रोमा दरवाजे की ओर बढी और जैसे ही उसने ये कह कर कि “कितनी देर कर दी आज …कब से इन्तजार कर रही, शुक्र है तुम आ गए पुलकित ” कह दरवाजा खोला तो वो एक दम से हक्की बक्की दंग खङी रह गई।

पुलकित कच्चे बनिया में वहां खङा था, क्योंकि जैसे ही वो ऑफिस से घर के लिए निकला तो कुछ दूर जाने पर उसके गाङी के टायर की हवा निकल गॢई। गाड़ी जहां रुकी वो रोड बङी सुनसान सी थी। आसपास कोई नही था। तभी पीछे से एक गाङी आ कर एकदम से रूकी और उसमे से चार हथियार बंद मुंह पर कपङा लपेटे आदमी बाहर आए और आते ही एक ने पुलकित को पीछे से धर दबोचा और दूसरे ने उसके आंखों पर पट्टी बांध दी, और उसके पैसे मोबाइल सब लूट लिया। यहाँ तक उसके कपङे तक उतरवा लिए और उस को सङक पर अकेला छोङ रफूचक्कर हो गए। पुलकित ना गाड़ी देख सका ना उसका नम्बर और ना ही उन लोगों की शक्लें।उस ने शहर में कपङा चोर गैन्ग आए हैं के बारे में बहुतों से सुना था कि वो कुछ जान हमला नही करते पर कपङे चुरा आदमी को नंगा छोङ जाते पर उसने कभी इस बात पर सचमुच में विश्वास नही किया था। पर आज उसके साथ ही हो गया।

किसी तरह पुलकित ने गाङी का टायर बदला और गाड़ी चलावो घर पहुंचा। रोमा पहले तो भौंचक्की सी खङे रही पर फिर पुलकित को ऐसी खस्ता हालत में देख उसकी हंसी छूट गई। चाह कर भी वो अपने आप को रोक ना पाई। पुलकित पहले तो नाराज था लग रहा पर जब रोमा ने अपनी गर्भवती होने की खबर पुलकित को सुनाई तो तब अपने लुटने का सब अफसोस खत्म हो गया। हँसते हँसते खुशी के मारे कच्छे बनियान में ही उसने रोमा को बाहों में जकङ लिया और बोला” चलो इस खुशी भरी बात पर मैं सोचूंगा कि ये मेरी तरफ से उन चोरों भाइयों को गिफ्ट” था।

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