क्या दिल्ली महिलाओं के लिए अभी भी सुरक्षित नहीं है ? एक और शर्मनाक निर्भया कांड !

क्या दिल्ली महिलाओं के लिए अभी भी सुरक्षित नहीं है ? एक और शर्मनाक निर्भया कांड !

अभी कुछ ज़्यादा समय गुजरा नहीं, निर्भया की घटना का दर्द से हम सब उबरे नहीं अब तक और ये फिर वैसी ही घटना हो गयी ?  समझ नहीं आता की समाज में बैठे ये ऐसे कुछ पापी दरिंदे कैसे रोके जा सकेंगे ?  इनका डर कैसे ख़त्म हो गया ? कैसे ये इतने निडर हो गए और मनमानी करने लगे ? क्यों बांकी समाज इनपर शिकंजा नहीं कस पाता ?

ऐसे कई सवाल साधारणतया  हमलोगों के जेहन में घूमता रहता है।  बहुत होता है, तो हम मोमबत्ती पकड़ कर जुलुस निकाल लेते हैं और लगता है सब ठीक हो जायेगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं होने वाला। आज भी ऐसी ख़बरों से अखबार भरे पड़े होते हैं।
लोग इन तरीकों से सुधरने वाले नहीं हैं. वे समाज को कमज़ोर समझते हैं इस लिए इन बातों का ऐसे गुंडे बदमाशों पर कोई असर होता नहीं दीखता.

कल रात को फिर निर्भया वाली घटना दुहरायी गयी. एक ३२ वर्षीय महिला के साथ मेट्रो में दुर्व्यवहार किया गया. श्रोतों के अनुसार महिला जिस कोच में बैठी थी वहां चार और महिलाएं भी बैठी थीं लेकिन शाहदरा आते ही वो चार तो निकल गयीं और ये बेचारी अकेली पड़ गयी.  उसका फायदा उठा के तीन बदमाश युवक कोच में घुस गए और छेड़खानी लगे. कोई उसका बैग छीन के भागने लगा तो कोई उसके साथ अश्लील हरकतें करने लगा. सूत्रों के आधार पर कहा जाता है की ये सारी घटनाओं के चश्मदीद गवाह दो पुलिस वाले हैं. महिला ने हर संभव प्रयास किया अपने को बचने की लेकिन कुछ न कर पायी और इन युवको के आगे मज़बूर हो गयी.  खबर है की आरोपी हिरासत में ले लिए हैं और महिला हस्पताल में भर्ती करा दी गयी है

आंकड़ों बताते हैं की दिल्ली में ऐसी घटना बिलकुल आम बात हो गयी है. हर रोज़ कम से कम चार  बलात्कार की  वारदात होती हैं और कई ऐसी निर्भयाओं की चीखें कुचल दी जाती हैं. 2015 में 2199 बलात्कार के रिपोर्ट दर्ज कराई गयी. दिल्ली जो हमारे देश राजधानी है उसमें भी महिलाओं का ये हश्र हो रहा होगा, ये कितना दुखदायी और शर्मसार होने लायक बात है, नहीं कहा जा सकता. हर साल इन अपराधों में बढ़ोतरी ही होती जा रही है. कभी सामूहिक बलात्कार तो कभी  कुछ और, एक से बढ़कर एक ऐसी सामाजिक संस्कार के गिरावट की खबर आती रहती है.

मानसिकता का स्तर कहाँ तक गिरेगा इसकी कोई सीमा नहीं है. सिर्फ दिल्ली ही नहीं पुरे देश से भी ऐसी खबर आती  जो इस बात को पुख्ता करती है की ऐसे लोगों को ठीक रास्ते पर लाने के लिए कुछ न कुछ सख्त और ठोस कदम उठाने ही होंगे. कुछ राजनीतिज्ञ ऎसी घटनाओं का उपयोग एक दूसरे पर  छीटाकशी करने में करते हैं  तो अपने किसी छुपे एजेंडे को पूरा करने में लगाते हैं. इन सबसे हमे बचना चाहिए  लोगों को मज़बूर करना चाहिए ताकि सरकार पर सही दबाव बनाया जा सके और सख्त कानून बने और लागू भी  सके.

क्या बलात्कार की इन घटनाओं के पीछे की वजह कहीं सरकारी इच्छाशक्ति की कमी तो नहीं है?

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