SeriesYour Stories

पान्डुजी के अन्दर का कलाकार-Panduji series(5)

पान्डुजी के अन्दर का कलाकार

पान्डुजी फिल्मों के बहुत शौकीन थे
मिज़ाज़ से थोड़े रँगीन थे
जिस हीरो की फिल्म जिस दिन थे देख आते
उस रोज़ अपनी कल्पना में वे वही बन जाते
हवाई किल्ले फिर खूब बनाते
रातों को सोते हुए बड़बड़ाते सपनों में डिशुम डिशुम कर कभी सँजय दत्त
खलनायक की पिटाई कर जातेतो कभी मश्हूर फिल्मों के सँवाद बड़बड़ाते
जब दिवार के अमिताभ हो जाते तो कह उठते,
“में आज भो फेंके हुए पैसे नही उठाता”
उस दिन तो पान्डुजी का रूप किसी डाॅन से कम नज़र नही आता
जिस दिन छत पर पानी की टँकी साफ करने जाते
तो उस दिन शोले के धरम गरम वीरू बन “मौसीजी,सूसैड सूसैड” चल्लाते
किसी दिन राजेश खन्ना की अदायें अपनाते
और “पुष्पा ,आइ हेट टियरज़” कह शीशे में खुद को निहारते जाते
कभी दिलिप कुमार के जैसे देवदास बन जाते
फिर पूरा दिन ‘पारो पारो’ बोल कान खा जाते
कभी बन जाते सलमान खान दबंग
तो कभी चढ जाता शारूख खान का  “क क क किरण” का उन पर रँग
पास पड़ोस वाले देख उनको मँह छिपा हँसते जाते
पर पान्डुजी तो दीन दुनिया से बेखबर अपने अन्दर छिपे कलाकार को बाहर निकालतने भ
में गुम हो जाते नये पुराने हीरों की नक्ल कर अपने ऐक्टिंग का शौक पूरा कर जाते
क्योंकि असलियत में बनना चाहते थे वो तो ऐक्टर
पर बद्किस्मती से बेचारे बन बैठै थे नौकर…

द्वारा अनु सैनी

Comment here